Income Tax Benefits: Tax Exemptions Available Under the New Tax Regime

Income Tax Benefits: More Than Just Standard Deduction in the New Tax Regime

कई लोगों को लगता है कि नई टैक्स रिजीम में टैक्स बचाने के रास्ते बंद हो जाते हैं। इसका कारण है कि इसमें पुराने डिडक्शन और एग्जेम्प्शन लागू नहीं होते। लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। नई टैक्स रिजीम में भी कुछ टैक्स लाभ मिलते हैं। इनका सही जानकारी के साथ फायदा उठाया जा सकता है। इससे आपकी टैक्सेबल इनकम और टैक्स देनदारी कम हो सकती है। आइए जानते हैं वे कौन-कौन से बेनिफिट्स हैं। जिनका लाभ आप नई टैक्स रिजीम में भी ले सकते हैं।

1. Employer’s Contribution to NPS & EPF is Tax-Free

अगर आपके एम्प्लॉयर NPS या EPF में योगदान करते हैं, तो वह टैक्स-फ्री होता है।

  1. प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को टैक्स छूट मिलती है।
    यह छूट बेसिक सैलरी + डीए के 10% तक के एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन पर होती है।
  2. सरकारी कर्मचारियों को यह लाभ 14% तक मिलता है।
  3. EPF में एम्प्लॉयर द्वारा किया गया 12% योगदान भी टैक्स-फ्री होता है।

उदाहरण:
अगर आपकी बेसिक सैलरी + डीए ₹1 लाख प्रति माह है,
तो प्राइवेट सेक्टर में ₹10,000 तक का NPS कंट्रीब्यूशन टैक्स-फ्री होगा।
सरकारी सेक्टर में यह छूट ₹14,000 तक मिलेगी।

2. Home Loan Interest Deduction on Rented Property

गर आपने होम लोन लेकर कोई घर खरीदा है और उसे किराए पर दे दिया है, तो आपको सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन पर दिए जाने वाले ब्याज की पूरी राशि को टैक्स से घटाने की अनुमति मिलती है।

1. अगर होम लोन ब्याज किराए की इनकम से कम या बराबर है, तो पूरी राशि टैक्स-फ्री होगी।
2. अगर ब्याज, किराए की आमदनी से अधिक है, तो इस घाटे को सैलरी या बिजनेस इनकम से सेट-ऑफ नहीं किया जा सकता।

उदाहरण:

  • अगर आपका वार्षिक होम लोन ब्याज ₹4 लाख है और किराया ₹5 लाख है, तो ₹4 लाख घटाकर सिर्फ ₹1 लाख टैक्सेबल इनकम बचेगी।
  • अगर ब्याज ₹4 लाख और किराया ₹2 लाख है, तो शेष ₹2 लाख का घाटा किसी अन्य इनकम से समायोजित नहीं किया जा सकता।

3. Leave Encashment & Gratuity Tax Benefits

अगर नौकरी छोड़ते समय या रिटायरमेंट पर बची हुई छुट्टियों का एनकैशमेंट मिलता है, तो यह एक तय सीमा तक टैक्सफ्री होता है।

1. प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए अधिकतम सीमा ₹25 लाख है।
2. सरकारी कर्मचारियों के लिए लीव एनकैशमेंट पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है।
3. 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी भी टैक्स-फ्री होती है।

4. Higher Standard Deduction in the New Tax Regime

नई टैक्स रिजीम में सैलरीड एम्प्लॉई और पेंशनर्स को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है।
यह राशि पुरानी टैक्स रिजीम से अधिक है।

  1. इस डिडक्शन के लिए किसी इन्वेस्टमेंट की जरूरत नहीं होती।
  2. न ही कोई डॉक्यूमेंट सबमिट करना होता है।
  3. यह आपकी टैक्सेबल इनकम से खुद-ब-खुद घट जाता है।

उदाहरण:
अगर आपकी सैलरी ₹16 लाख है,
तो ₹75,000 घटने के बाद टैक्सेबल इनकम ₹15.25 लाख हो जाएगी।
इससे आपकी टैक्स देनदारी कम होगी।

5. Tax-Free Gifts under the New Tax Regime

नई टैक्स रिजीम में कुछ विशेष प्रकार के गिफ्ट्स टैक्स-फ्री होते हैं, जिससे अतिरिक्त टैक्स लाभ मिल सकता है।

1. माता-पिता, भाई-बहन, जीवनसाथी या बच्चों से मिले गिफ्ट्स टैक्स-फ्री होते हैं।
राशि कितनी भी हो, उस पर टैक्स नहीं लगता।

2. किसी अन्य व्यक्ति से ₹50,000 तक का गिफ्ट टैक्स-फ्री होता है।
इससे अधिक राशि पर टैक्स लग सकता है।

3. शादी के मौके पर मिले सभी गिफ्ट्स टैक्स-फ्री माने जाते हैं।
देने वाला कोई भी हो, इस पर टैक्स नहीं लगता।

Final Thoughts: Making the Right Tax Regime Choice

नई टैक्स रिजीम में अब ₹12 लाख तक की आय टैक्स-फ्री हो गई है। इसके साथ अगर ऊपर बताए गए अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट्स भी जोड़ें, तो यह विकल्प पहले से ज्यादा आकर्षक लगता है। टैक्सपेयर्स को दोनों टैक्स रिजीम की तुलना करनी चाहिए। उन्हें अपनी टैक्स देनदारी दोनों सिस्टम में जांचनी चाहिए। इसके बाद ही तय करें कि कौन सी टैक्स रिजीम उनके लिए बेहतर है।

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